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बच्चों पर अधिक फोन देखने के दुष्परिणाम और समाधान स्मार्टफोन, टैबलेट, और अन्य डिजिटल गैजेट्स का उपयोग बच्चों के लिए सामान्य हो गया है। जबकि ये उपकरण ज्ञान प्राप्त करने और मनोरंजन के साधन हैं, लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस लेख में, हम इस समस्या के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे और इसका समाधान प्रदान करेंगे, जो विशेष रूप से डॉ. शारिक कुरैशी, बच्चों के विशेषज्ञ की सलाह से तैयार किए गए हैं। बच्चों पर अत्यधिक स्क्रीन समय के नकारात्मक प्रभाव 1. विज़न (Vision) संबंधी समस्याएँ: स्मार्टफोन और टैबलेट की स्क्रीन को लगातार देखने से बच्चों की आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे दृष्टि संबंधी समस्याएं जैसे मायोपिया (नियरसाइटेडनेस) बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से आंखों में सूखापन, जलन, और थकान हो सकती है, जो बच्चों के दृष्टि विकास को प्रभावित कर सकती है। 2. नींद की समस्याएँ: डिजिटल उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जो नींद को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब बच्चे रात को सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग करते हैं, तो यह उनकी नींद की गुणवत्ता को खराब कर सकता है। नींद की कमी से बच्चों में चिड़चिड़ापन, थकान, और ध्यान में कमी हो सकती है, जिससे उनका शैक्षणिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। 3. शारीरिक समस्याएँ: लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर स्क्रीन देखने से बच्चों में खराब मुद्रा, पीठ दर्द, और गर्दन दर्द जैसी शारीरिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। स्क्रीन के सामने घंटों बिताने से बच्चों की शारीरिक गतिविधियों में कमी आती है, जिससे मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं। 4. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: अत्यधिक स्क्रीन समय बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह उनके सामाजिक जीवन को सीमित कर सकता है, जिससे वे अकेलापन महसूस कर सकते हैं। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से बच्चों में चिंता, अवसाद, और आत्म-संवेदना की कमी हो सकती है। यह उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और उनके आत्मविश्वास को कम कर सकता है। 5. अकादमिक प्रदर्शन पर असर: जब बच्चे अपना अधिक समय डिजिटल उपकरणों पर बिताते हैं, तो यह उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। ध्यान की कमी, एकाग्रता की समस्या, और पढ़ाई के प्रति उदासीनता उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा, डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता उनके सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। 6. सामाजिक कौशल की कमी: बच्चों का अधिकतर समय स्क्रीन पर बिताने से उनके सामाजिक कौशल में कमी आ सकती है। वे वास्तविक जीवन के संपर्कों से दूर हो सकते हैं, जिससे उन्हें सामाजिक संवाद में कठिनाई होती है। यह समस्या बच्चों के सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकती है, जिससे उन्हें दोस्तों और परिवार के साथ बेहतर संबंध बनाने में परेशानी हो सकती है। समाधान: बच्चों के स्क्रीन समय को प्रबंधित करने के उपाय 1. स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करें: बच्चों के लिए स्क्रीन समय को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्हें दिनभर में स्क्रीन का उपयोग करने का सीमित समय निर्धारित करें और उस समय को ध्यान से मॉनिटर करें। इससे बच्चों को संतुलित जीवनशैली अपनाने में मदद मिलेगी और वे अन्य गतिविधियों में भी शामिल हो सकेंगे। 2. बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा दें: बच्चों को बाहरी खेल-कूद, शारीरिक गतिविधियों, और रचनात्मक कार्यों में शामिल करने के लिए प्रेरित करें। इससे न केवल उनकी शारीरिक फिटनेस में सुधार होगा, बल्कि यह उनके मानसिक और सामाजिक विकास में भी मदद करेगा। बाहरी गतिविधियाँ बच्चों के लिए स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकती हैं। 3. स्क्रीन के उपयोग के लिए समय सीमा निर्धारित करें: डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने के लिए समय सीमा निर्धारित करें और सुनिश्चित करें कि बच्चे उस समय सीमा का पालन करें। इस दौरान उन्हें उचित ब्रेक लेने की सलाह दें ताकि उनकी आंखों को आराम मिल सके और वे ताजगी महसूस करें। 4. परिवार के साथ गुणवत्ता समय बिताने को बढ़ावा दें: बच्चों के साथ गुणवत्ता समय बिताना महत्वपूर्ण है। उन्हें पारिवारिक गतिविधियों में शामिल करें, जैसे कि सामूहिक भोजन, खेल, और बातचीत। यह उनके साथ आपके संबंध को मजबूत करेगा और उन्हें डिजिटल उपकरणों से दूर रखने में मदद करेगा। 5. मनोवैज्ञानिक सहायता लें: यदि आपका बच्चा अत्यधिक स्क्रीन समय के कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहा है, तो एक विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। डॉ. शारिक कुरैशी जैसे अनुभवी बाल मनोचिकित्सक के पास जाकर आप बच्चों की मानसिक स्थिति का सही आकलन कर सकते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। 6. शिक्षण और मनोरंजन को संतुलित करें: डिजिटल उपकरणों का उपयोग पूरी तरह से बंद करना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन इसे संतुलित करना आवश्यक है। बच्चों को शैक्षिक ऐप्स और कार्यक्रमों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें, जो उनके ज्ञान और कौशल को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही, उन्हें मनोरंजन के लिए भी कुछ समय दें, लेकिन उसे सीमित रखें। डॉ. शारिक कुरैशी की विशेषज्ञ सलाह डॉ. शारिक कुरैशी, जयपुर के मनोचिकित्सक, इस समस्या के समाधान में आपकी मदद कर सकते हैं। उनके पास बच्चों की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में वर्षों का अनुभव है। वे बच्चों के स्क्रीन समय को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ सलाह प्रदान करते हैं और परिवारों को सही दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। डॉ. कुरैशी बच्चों की मानसिक समस्याओं का गहराई से विश्लेषण करते हैं और उन्हें स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।